हँसो कि सुबह की पहली धूप हो जाओ !

हँसो, उनकी आँख में आँख डाल कर हँसो
उनके मुँह पे हँसो, ठहाके मार कर हँसो
उनके चबूतरे और खलिहान में हँसो
उनके भविष्य और वर्तमान पे हँसो
उनके भूत और भूत के पूत पे हँसो
अपनी टीस उनकी खीस पे हँसो
जो न हँसे तो मुर्दा माने जाओगे
फिर जलाये या दफ़नाये जाओगे,
कुछ न करने से अच्छा है,
हँसी को हथियार बनाओ
हँसी को इंकलाब बनाओ
हँसी को आवाज़ बनाओ
हँसो कि उस में भगत गूंज जाय
अश्फाक-बिस्मिल का विश्वास गूंज जाय
आज़ाद का फड़कता इंकलाब गूंज जाय
हँसो, कि न हसे तो गूंगे माने जाओगे
एड़ियों तक घुमा के मोरे जाओगे
हँसी को सवाल और ज़बाब बनाओ
हँसो कि अब वो दबा नहीं सकते
बरगला नहीं सकते, डरा नहीं सकते
हँसो नहीं तो सामान हो जाओगे
बाज़ार में सजाए जाओगे
बेचे और खरीदे जाओगे
इस्तेमाल के बाद नाले में फेके जाओगे
या जलाये जाओगे, या बहाए जाओगे
हँसो कि जिन्दा माने जाओ
हँसो कि अभी मुर्दा नहीं हुए
हँसो कि सुबह की पहली धूप हो जाओ
और फैल जाओ दिग-दिगंत तक
***
15-05-2019
… सिद्धार्थ…

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