Apr 7, 2020 · कविता

स्वास्थ्य ही जीवन का मूल आधार

स्वास्थ्य ही जीवन का मूल आधार
स्वास्थ्य बिना सब बेकार
स्वास्थ्य ही जीवन की पूँजी
यही प्राणों का आधार

नित प्रातः काल आलस्य त्यागकर
योग करो तुम सदा
दिवस रहेगा तुम्हारे अनुकूल
यही सफल कार्य सम्पदा

प्रकृति के मनमोहक रूप को
निहार अन्तर्मन सँवारो
पक्षी कलरव करते कुसुम
मंद मंद मुस्कुराते भोर

रवि सदैव कर्मशीलता का
सन्देश देता हमें
ईर्ष्या द्वेष मोह त्याग कर
निज कर्मो में लीन रहो

स्वस्थ तन मन में
उत्तम विचारों का भरो भंडार
यही स्वस्थ जीवन का आधार
स्वास्थ्य बिना सब बेकार

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