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स्वयं सुधार

Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra

कविता

August 4, 2017

स्वयं सुधार कर एक नयी शुरूआत करे
घने अज्ञान के तम मे ज्ञान का प्रभात करे
समय को बहुमूल्य समझे इसे न व्यर्थ बर्वाद करे।
बेवजह की गल्प त्यजकर. प्रगति की बात करे।
बुराइयो को निकाले मन से और उसे मात करे।
सब कुशल युक्त हो अच्छाइयां युक्त गात करे
उठे जगे श्रेष्ठ को पहचाने. और उनका ही साथ करे।

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Author
Vindhya Prakash Mishra
विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र साहित्य सृजन में रूचि रखता हूँ । चिंतनशील जीव होने के कारण कुछ न कुछ सृजित करता हूँ । पर वीणापाणि माँ की कृपा दृष्टि के बिना सम्भव नहीं है । एक साधना के रूप में मनन... Read more
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