Skip to content

स्वतंत्रता की अलख

जगदीश लववंशी

जगदीश लववंशी

कविता

August 13, 2017

लहराये तिरंगा भवन भवन,
भारत माता को नमन नमन,
गीतों से गूंज रहा गगन गगन,
गा रहा जन होकर मगन मगन,
हर जुबां पर है वतन वतन,
गूँज रहे नारे सदन सदन,
गली गली में हो रही चहल पहल,
देख तिरंगे की शान शत्रु जाये दहल दहल,

स्वतंत्रता की अलख जगाने जब चले नवजवान,
कदम बढ़ते गए, मिली जीत की कमान,
क्या उत्साह था, थी एक नई उमंग,
चहुँ ओर फैला था स्वतंत्रता का रंग,

देशभक्तों पर अर्पण हैं श्रद्धा सुमन,
बना रहे देश मे सुख शांति और अमन,
देशभक्ति की बहती रहे बयार,
खुशयों की आये सदा बहार,
।।।जेपीएल।।।

Share this:
Author
जगदीश लववंशी
J P LOVEWANSHI, MA(HISTORY) ,MA (HINDI) & MSC (MATHS) "कविता लिखना और लिखते लिखते उसी में खो जाना , शाम ,सुबह और निशा , चाँद , सूरज और तारे सभी को कविता में ही खोजना तब मन में असीम शांति... Read more
Recommended for you