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*** स्वच्छता अभियान चल रहा ***

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

October 11, 2017

दिनांक 11.10.17

स्वच्छता अभियान चल रहा
देखो
स्वच्छता अभियान चल रहा
लोग अपने घरों का कूड़ा-करकट
फैंक रहे जी-भर घर-भर का
भारत सरकार चला रही देखो
स्वच्छता अभियान चल रहा
देखो धू-धू कर जल रहा है
घर-घर का कट्ठा कूड़ा-करकट
ना भेद अमीर-गरीब जात-पांत
भेद भुला अभेद हो हो कर
सीख दे रहा सब इक दिन
मिलना माटी-संग हो अभेद
ना करना खेद फिर-फिर तुम
माटी तो माटी फिर-फिर माटी
ये भेद खड़े कर देते हम
माटी से बनते सब भांडे भिन्न-2
कैसे हो सकते है माटी के अंग
इक दीपक इक मटका मन भटका
खेल खिलौने सब माटी के सब को
इक दिन माटी में मिल जाना
आना-जाना माटी से माटी में
फिर-फिर मिल जाना फिर आना
यह संसार- चक्र इसको दोहराना
ना आना बस, ना जाना बस में
क्षण एक पता नहीं कल किसका
क्षण-विस्फोट कण- विस्फोट अब
किस्सा लोगों को समझना किसका
सोचा था दो कोर मुख अन्न धरूं
अब समय बीत पछताना किसका
स्वच्छता अभियान चल रहा देखो
स्वच्छता अभियान चल रहा
दीपावली मनाने के उपलक्ष
स्वच्छता अभियान चल रहा
देखो चलता फिरता जगमग करता
किसी घर का आज दीप बुझ गया
किसने यह विस्फोटक फैंका देखो
दाम-लालच चाम-थैला फट गया
चीथड़ों में लिपटा चिथड़ा हो गया
वो भी लाल बालगोपाल किसी का
आज उठा फिर चिर-निद्रा सो गया
स्वच्छता अभियान चल रहा देखो
स्वच्छता अभियान चल रहा
कौन आज साफ़ अपना घर कर
मेरा शहर फ़िर से गन्दा कर गया
क्यों लीलते हो जिंदगियां इसक़दर
किसी जिंदगी को सफ़र कर गया
रो रही होंगी… उसकी माँ आज
बिफ़र-बिफ़र मेरा लाल किधर गया
स्वच्छता अभियान चल रहा देखो
स्वच्छता अभियान चल रहा
आदमी आदमी को देखो
कैसे है छल रहा
स्वच्छता अभियान चल रहा देखो
स्वच्छता अभियान चल रहा
।।

?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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