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स्लेट-बत्ती सी जिन्दगी

Dr ShivAditya Sharma

Dr ShivAditya Sharma

कविता

June 13, 2016

होती जिन्दगी स्लेट-बत्ती सी तो जीना कितना आसान होता।
गलती होते ही मिटा देते
सही करके दिखा देते
धुंधली होती स्लेट तो नल के नीचे धो लेते
चलती ना कोई बत्ती तो पानी में भिगो लेते
होता सब साफ सुथरा काट छाट का ना निशान होता
होती जिन्दगी स्लेट-बत्ती सी तो जीना कितना आसान होता।

Author
Dr ShivAditya Sharma
Consultant Endodontist. Doctor by profession, Writer by choice. बाकी तो खुद भी अपने बारे में ज्यादा नहीं जानता, रोज़ जिन्दगी जैसी चोट करती है वैसा ही ढल जाता हूँ।
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