23.7k Members 50k Posts

स्मृति

बंद खिड़कियाँ
गर्द पड़े परदे
इन खिड़कियों को मत खोलो
परदों को मत सरकाओ
इनसे जो सूरज की रोशनी
छनकर आती है
झाँकती है उनमें कुछ स्मृतियाँ
फिर वही सर्द हवाओं का छुअन
तन में सिहरन
विकल मन में कुछ चुभन
ये वे स्मृतियाँ हैं
जिन्हें
क्षितिज के उस पार
अस्ताचलगामी सूरज के साथ
दरिया में डुबोये थे
वे स्मृतियाँ
जिनके लिये
जागती आँखों से सोये थे
या वे
जिनके लिये
मुस्कुराते हुए अंतस भिगोये थे
उन विस्मृतियों से गर्द न झड़ने दो
उन स्मृतियों को पुनः न उभरने दो।

-©नवल किशोर सिंह

3 Likes · 5 Views
नवल किशोर सिंह
नवल किशोर सिंह
वर्तमान-तिरुचि,तमिलनाडु
162 Posts · 3.5k Views
पूर्व वायु सैनिक, शिक्षा-एम ए,एम बी ए, मूल निवासी-हाजीपुर(बिहार), सम्प्रति-सहायक अभियंता, भेल तिरुचि, तमिलनाडु, yenksingh@gmail.com...
You may also like: