“स्मृति स्पन्दन”

आज मौन में कुछ हलचल सी है ,
नयनों में कुछ कल – कल सी है |
उर -आँगन में मचली गूंज सी है ,
स्मृति-स्पन्दन ये अनबूझ सी है ||
…निधि …

2 Comments · 21 Views
Copy link to share
"हूँ सरल ,किंतु सरल नहीं जान लेना मुझको, हूँ एक धारा-अविरल,किंतु रोक लेना मुझको" View full profile
You may also like: