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स्पर्श/संस्पर्श

प्रदीप कुमार दाश

प्रदीप कुमार दाश "दीपक"

हाइकु

February 18, 2017

स्पर्श/संस्पर्श
01. तेरी छुवन
मन बगर गया
मानो बसंत ।
☆☆☆
02.हवा बहकी
सुमनों को छू कर
महका गयी ।
☆☆☆
03.मोम का तन
बत्ती की छुवन से
हुआ गलन ।
☆☆☆
04.माटी का लौंदा
कुम्हार का स्पर्श रे !
कलश पक्का ।
☆☆☆
05. वाह्ह. इन्सान
धरा से उठ कर
छू लिया चाँद ।
☆☆☆
□ प्रदीप कुमार दाश “दीपक”
मो.नं. 7828104111

Author
प्रदीप कुमार दाश
हाइकुकार : ♢ प्रदीप कुमार दाश "दीपक" ♢ सम्प्रति : हिन्दी व्याख्याता 13 कृतियाँ : -- मइनसे के पीरा, हाइकु चतुष्क, संवेदनाओं के पदचिह्न, रुढ़ियों का आकाश, हाइकु वाटिका, हाइकु सप्तक, हाइकु मञ्जूषा, झाँकता चाँद, प्रकृति की गोद में, ताँका... Read more
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