मुक्तक · Reading time: 1 minute

स्पंदन….

स्पंदन….

झुकी नज़र रक्ताभ अधर
…हुए अंतर्मन के भाव प्रखर
……घोर तिमिर में स्पर्श तुम्हारे
…………स्वप्न स्पंदन सब गए निखर

सुशील सरना

30 Views
Like
68 Posts · 2.5k Views
You may also like:
Loading...