Jun 7, 2016 · कविता

स्त्री

स्त्री है ये
थक नहीं सकती है ये
रुक नहीं सकती है ये
आये जो कोई बाँधा तो
झुक नहीं सकती है ये
स्त्री है ये!!
जो हमेशा ताप दे
एक वो अंगार है
जो हमेशा प्रकाश दे
एक वो दीप है
आये जो कोई आँधी तो
बुझ नहीं सकती है ये
स्त्री है ये!!

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सुधा सिंह रिहन्द नगर, सोनभद्र संघर्षरत जीवन में कटू यथार्थ झेलते हुए मन जब कल्पनाओं...
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