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स्त्री ! सच तुम महान हो..

अजीत कुमार तलवार

अजीत कुमार तलवार "करूणाकर"

कविता

February 14, 2017

एक स्त्री ही कर सकती है निर्माण
अपने परिवार का
एक स्त्री ही कर सकती मजधार
से बेडा पार अपने परिवार का

आज जब देखता हूँ गर्भ
में हत्या होते हुए बालिका के भ्रूण की
उठ जाते हैं न जाने कितने
तूफ़ान मेरे दिल के अंदर

क्यों कर के यह लज्जा वाला काम ,ओ इस
को पैदा होने से पहले मारने वालो
किस काम का तुम्हारा यह अभिमान
ओ इस जीव की हत्या करने वालो

वो माँ है, वो बेटी है, वो बहन है,
वो पत्नी है, वो दादी है, पड़दादी है
वो मार्ग दर्शक है , वो तेरा सब कुछ है
वो तेरा कर्म सिधारक है, वो तेरा माली है
नमन कर उसका, अभिनन्दन कर उसका
वो तेरी रक्षा करने वाली है

तुझ पर कर्ज बहुत हैं उसके , हे वनमाली
तू भूल स्वीकार कर अपनी, वो तेरी है वनमाली
तुझे पैदा उस ने किया, दर्द सहन कर करके
दुनिया से छुपा कर रखा ,वो कितनी है सहने वाली !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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Author
अजीत कुमार तलवार
शिक्षा : एम्.ए (राजनीति शास्त्र), दवा कंपनी में एकाउंट्स मेनेजर, पूर्वज : अमृतसर से है, और वर्तमान में मेरठ से हूँ, कविता, शायरी, गायन, चित्रकारी की रूचि है , EMAIL : talwarajit3@gmail.com, talwarajeet19620302@gmail.com. Whatsapp and Contact Number ::: 7599235906