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स्तुति * शिव शंभो शिव शंभो *

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

February 24, 2017

शंभो शिव शंभो प्रभो शूलपाणे प्रभो
शंभो शिव शंभो प्रभो शूलपाणे प्रभो
शिवाकांत त्रिपुरारे हर हर शंभो शंभो
काशीपते विश्वनाथ पुरारि शिवषम्भी
आज मैं आया तेरी शरण में
नाथ पार उतारो जगउदधि से
पशुवत है व्यवहार हमारो
तुम पशुपति नाथ उद्धारो
काम क्रोध मद मोह लोभ सब
जीवन -मोक्ष पर आज विसारो
नमामि नमामि भवं शिवं
भवतारक जपं शिवं शिवं
स्मरारे पुरारि कामारि भवे
नीलकंठ उमापति काशीपते
जाति पता ना मात-पिता
स्वयंभू शिवापति गौरीपते
भोले नाथ उद्धारो ना भेद करो
अभेद अछेद मो ना जानी परो
अभ तुम ही भव की पीर हरो
शिव शंभो शिव शंभो शुभ करो
इस भव- सागर को शुद्ध करो
शिव शंभो शिव शंभो
ॐ नमः शिवायः शिव शंभो शिव शंभो

?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more

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