कविता · Reading time: 1 minute

” स्टैच्यू ऑफ यूनिटी “

“स्टैच्यू ऑफ यूनिटी”

*****************************

बिखरी पड़ी थी जो सभ्यता और संस्कृती
प्रदर्श रूप हो गई वो “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी
एकता अखंडता की मिशाल बनी मां भारती
विलय कर रियासतों को समप्रभू बना दिया
नीव जिसने रख दिया वो है लौह भाई पटेल जी।

चूम रहे पटेल जी धरती से आसमान को
नाम उनका पड़ गया “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी”
कूटनीति कौटिल्य की जो शौर्य में शिवा जी
“सरदार” नाम पड़ गया आन्दोलन बारदौली की
प्रतिभा पुरुषार्थ से प्रण परमार्थ से सेवा की राष्ट्र की ।

जिनकी संकल्पना से मार्ग सुगम हो गया
एक छोर कच्छ हुआ दूसरा कोहिमा
मार्ग प्रशस्त हो गया कश्मीर से कन्याकुमारी भी
मान भंग कर दिया जूनागढ़ और निजाम की
ऐसे वीर की मूर्ती बनाए दिया राम वी. सुतार जी ।

कॉरवा चला था जो पहुंचा पड़ाव पर
स्थापना भी हो गई केवड़िया मिशन मोड़ पर
कीर्ति पताका उड रही मां भारती की विश्व के मंच पर
मूर्ती पटेल जी की गाथा गा रही तकनीकी विकास की
अभिषेक कर रहा हो जैसे आकाश भी पटेल जी की ।

“””””””””””सत्येन्द्र प्रसाद साह (सत्येन्द्र बिहारी)”””””””””””

3 Likes · 3 Comments · 52 Views
Like
You may also like:
Loading...