कविता · Reading time: 1 minute

“स्कूल के दिन”

बीते दिनों को सोचकर,
हम पछताने लगे,,
जब याद मुझे अपने,
गुज़रे हुए दिन आने लगे!
फिर सम्भल कर उस वक़्त को,
हम भुलाने लगे,,
तब तक आँखो से मेरे,
आँसु आने लगे!
हम आंखो से अपने आँसू,
पोछने ने लगे,,
और बीते वक़्त की यादो मे,
हम डूबने लगे!
की वो भी वक़्त था जब,
स्कूल/कॉलेजो को जाते थे हम,,
अपनी दोस्ती के लिए,
किसी से लड़ जाते थे हम!
वक़्त गुज़ने लगा,
और दिन बदलने लगा,,
हर दोस्त एक-दूसरे से,
फिर बिछड़ने लगा!
दिलो मे मेरे बस,
उनकी यादे रहने लगी,,
उनकी यादे मुझे,
हरदम सताने लगी!
वो वक़्त खुदा से माँगता हूँ,
मगर आता नही,,
वो लम्हा मेरी निगाहो से,
अब जाता नही!
फिर सम्भल कर उस वक़्त से,
हम बाहर आने लगे,,
हाथो से अपने आँसुओ की,
धारा मिटाने लगे!
अपने दिनों को सचकर,
हम पछताने लगे,,
जब याद मुझे अपने,
गुज़रे हुए दिन आने लगे!!

((((ज़ैद बलियावी))))

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