कविता · Reading time: 1 minute

सौ सिर वाले सैंकड़ो रावण जिन्दा हैं ..

सौ सिर वाले सैंकड़ो रावण जिन्दा हैं …

हमने सदियों से हर वर्ष दशहरा पर ,
राक्षसी प्रवृति के प्रतीक ,
रावण ,मेघनाद ,कुम्भकर्ण के पुतले जलाए , .
और सोचा कि हमने ,
अधर्म पर धर्म की विजय पाली ,
असत्य पर सत्य की विजय पाली ,
बुराई पर अच्छाई की विजय पाली ,
परन्तु क्या हम वास्तव में विजयी रहे ?
नहीं ,कदापि नहीं ,क्योंकि ,
आज भी देश से अधर्म का नाश नहीं हुआ ,
आज भी देश से बुराई का नाश नहीं हुआ ,
आज भी देश में झूठ का बोल वाला है ,
यही नहीं…….
दंगा फ़साद कराने वाले ,
साम्प्रदायिकता भड़काने वाले ,
धार्मिक उन्माद बढ़ाने वाले
आपस में लड़वाने वाले ,
उग्रवाद फ़ैलाने वाले ,
सैकड़ों रावण जिन्दा हैं ?
हिंदुस्तान को बांटने वाले,
देश बांटकर खाने वाले,
भारत माँ को काटने वाले,
घोटाले कर जाने वाले,
वंशवाद फ़ैलाने वाले,
सैकड़ों रावण जिन्दा हैं ?
चारा तक चर जाने वाले,
यूरिया तक खा जाने वाले,
डीजल ,पेट्रोल पी जाने वाले,
नकली मुद्रा और हवाले ,
भ्रष्ट्राचार बढाने वाले ,
सैकड़ों रावण जिन्दा हैं ?
दस सिर वाले रावण को ,
तो श्री राम ने मार दिया ,
सौ सिर वाले रावण ,
आज भी जिन्दा हैं ,
इनका वध कर पाना मुश्किल है,
सारा देश शर्मिंदा है |

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