Skip to content

सोने की चिड़िया

VEENA MEHTA

VEENA MEHTA

कविता

August 14, 2016

……………

है क्रोध विचलित सीने में,
क्या हो रहा है?
बोलो…….
क्या हो रहा है?
इस देश में !
क्या?
यही सपना था ,
हमारे अमर शहीदों का।
क्या?
यही देखने को हमें आजादी मिली थी।
सोने की इस चिड़िया का,
नाम कहीं गुम है।
हर गली मोहल्ले में,
देश का वीर,कहीं सुप्त है।।

बह रही है,खून की नदियाँ,
जहाँ कभी दूध था बहता।

बेटियाँ अपने ही घरों में,
ना सुरक्षित हैं,
बाहर की क्या बात करूँ।

जिस आँचल की छाँव में,
बचपन बीता करता था।
उसी आँचल को ,
नीलाम होते देखते हैं।

कभी भाई,भाई पर
न्यौछावर था,
आज झुकाना चाहता है।

अब सीने में देश भक्ति नहीं,
हिंसा की चिंगारी भड़कती है।

जहाँ कभी घर मंदिर था,
नींव का पत्थर था विश्वास,
आज भ्रष्टाचार में,
परिवर्तित हो गया है।

मन विचलित हो उठा है,
नींद गुम हो गयी है।
देख कर इस माँ की दुर्दशा,
सीने में क्रोध उबलता है।।

मत करो कुछ ऐसा कि,
कि शर्म सार हो जाए हम।

आओ यह शपथ लें,
अपना,
सिर्फ अपना,
देश संभाल लें।

ना घुटने दें,
नारी जीवन,
नारी को सम्मान का,
अधिकार दें।

नन्ही परी को,
कोख में ही ना खत्म करें।
नन्ही सी जान का,
जीवन आओ सँवार दें।।

हो चारों तरफ भाई चारा,
ऐसा कुछ गुण गान करें।
शांति और अहिंसा से,
सबके मन प्रेम भरें।।
जय हिंद जय भारत!!!!!!

Share this:
Author
VEENA MEHTA
Recommended for you