गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

सोतों को जगाना है

*सोतों को जगाना है*
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काफिया-ना रदीफ़-है
222 122 22
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सोतों को जगाना है,
फर्जों को निभाना है।

त्यागो मो ह सब सारे,
जीवन ही खजाना है।

मृत्यु आखिरी यात्रा,
बाकी सब बहाना है।

सुख दुख रहें मिलते,
यादों को भुलाना है।

जी भर के नही खाना,
भूखों को खिलाना है।

सब कुछ ही बदला है,
यह बिगड़ा ज़माना है।

मनसीरत बताए क्या,
हर कोई सियाना है।
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सुखविंद्र सिंह मनसीरत
खेड़ी राओ वाली (कैथल)

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