कविता · Reading time: 1 minute

सोच

सोचती थी
क्या तुम्हारी सुगंध को
मेरी खुशबू रास आयेगी
क्या वो उसमें समा पायेगी
क्या अपने अस्तित्व को
तुममें खो पायेगी
हंस पड़े थे अधर
नाबालिक सोच पर

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