कविता · Reading time: 1 minute

सोचा था

सोचा था नूर सा ख़्वाब लिखूं,
सोचा था नूर सा ख़्वाब लिखूं।
इक फलक से इक जहां तक याद लिखूं।।
पर इस जिंदगी की जद्दोजहद में,
ना ख़्वाब लिख सके,और न याद।।।।
बहुत मुश्किल है कहते लोग जिंदगी, इसलिए शायद
किसी को इस जद्दोजहद में मर जाना आसान लगा।।
यूं तो बहुत से फलसफे है इस जिंदगी में,
पर अब हमें भी उस रास्ते पर ही चलना आसान लगा।

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