Jun 12, 2016 · कविता

"सोचकर देखो"

युग बदल रहा है तुम भी जरा बदल कर देखो,
मोह माया से दूर कहीं सीधे चलकर देखो !
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वक्त का सुरुर बहुत कुछ है कहता यहाँ,
मंज़िल है कहाँ तुम बस ये सोचकर देखो !
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आयेगा वक्त इस कदर तुम्हारा भी कभी ,
बडे हो गये हो ज़रा बडा सोचकर तो देखो!
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मिलेगा यहाँ फरिश्ते की तरह कोई,
अबकी बार भरोसा करके देखो !
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खुदा ने भेजा है तुम्हे किसी अच्छे के लिये यहाँ,
इस कदर कभी खुद को समझकर तो देखो !
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आस्था भी निराधार भक्ति भी जरुरी यहाँ ,
सयंम कभी तो कभी खुद को शांत करके तो देखो !
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बदल गया यहाँ बहुत कुछ यहाँ ,
खुद को भरी नींद से ज़गा कर तो देखो !

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मैं Brijpal Singh (Brij), मूलत: पौडी गढवाल उत्तराखंड से वास्ता रखता हूँ !! मैं नहीं...
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