Jun 10, 2016 · कविता
Reading time: 1 minute

सोचकर देखो

युग बदल रहा है तुम भी जरा बदल कर देखो मोह-माया से दूर कहीं सीधे चलकर देखो !

वक्त का सुरुर बहुत कुछ है कहता यहाँ , मंज़िल है कहाँ तुम बस ये सोच कर देखो !

आयेगा वक्त इस कदर तुम्हारा भी कभी, बडे हो गये हो ज़रा बडा सोचकर देखो !

मिलेगा यहाँ फरिश्ते की तरह कोई, अब की बार भरोसा करके तो देखो !

खुदा ने भेजा है तुम्हे किसी अच्छे के लिये यहाँ , इस कदर कभी खुद को समझकर तो देखो !

आस्था भी निराधार भक्ति भी जरुरी यहाँ, सयंम कभी तो कभी खुद को शांत करके तो देखो !

बदल गया यहाँ बहुत कुछ यहाँ, खुद को भरी नींद से जगा कर तो देखो !

.. ..बृज

1 Like · 2 Comments · 144 Views
Copy link to share
Brijpal Singh
83 Posts · 5.3k Views
Follow 1 Follower
मैं Brijpal Singh (Brij), मूलत: पौडी गढवाल उत्तराखंड से वास्ता रखता हूँ !! मैं नहीं... View full profile
You may also like: