Jun 16, 2016 · मुक्तक
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” सोंच रहा हूँ क्या दे दूँ जो दिल से दिल की राह खुले “

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करकमलों से उसने मुझको, जब प्यारा स्पर्श दिया ।
रोम रोम पुलकित सारा , ऐसा दिल में हर्ष दिया ।
सोंच रहा क्या दे दूँ जो, दिल से दिल की राह खुले ,
अहसासों को उसने मेरे अर्श तलक उत्कर्ष दिया ।
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वीर पटेल

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Kavi DrPatel
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मैं कवि डॉ. वीर पटेल नगर पंचायत ऊगू जनपद उन्नाव (उ.प्र.) स्वतन्त्र लेखन हिंदी कविता... View full profile
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