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सैनिक का फर्ज शहीद होना और आपका?

रागिनी गर्ग

रागिनी गर्ग

कविता

January 2, 2017

वो तो कुर्बान होकर अपना नाम शहीदों में लिखा गया।
फर्ज वो भारत माता के प्रति अपना चुका गया।
बुझ गया इस घर का चिराग और परिवार में अंधेरा गहरा गया।
कौन इसकी माँ के आँसुओं का बोझ संभालेगा?
कौन उसके परिवार की नैया को उबारेगा?
फिर सियासत होगी फिर मजाक बनेगा।
राजनीति की रोटी पकेगी।
झूठी हमदर्दी और दिखावा होगा।
उसको तो दुश्मन की गोली से मरकर भी चैन नहीं
अब उसके शव का भी कत्लेआम होगा।
बहुत हो गया यह मौत का तांडव
हर रोज एक खिलखिलाता चेहरा
मिट्टी में विलय हो जाता है।
सारा कर्ज सैनिक ही क्यूँ चुकाता है?
क्या सिर्फ उसका ही भारत से नाता है।
जिस घर का चिराग कुर्बान हो जाता है।
क्या वहाँ कोई दूसरा दीपक जला आता है?
जी नहीं वहाँ तो कोई झाँकने भी नहीं जाता है।
फिर क्यूँ सैनिक को ही कर्ज और फर्ज सिखाया जाता है?

देश की सेवा उसका फर्ज
शहीद हो जाए तो चुका दिया कर्ज।
आप दो घंटे लाइन में नहीं लग सकते
वो आपके लिए पूरी रात काली कर आता है।
सिर्फ सैनिक का ही नहीं आपका भी देश से नाता है।
सिर्फ सैनिक का ही नहीं आपका भी देश से नाता है।
इनकी शहादत का मजाक मत बनाओ। इनके शवों पर मत राजनीति रचाओ।

लङो बन्दूक हाथ में लेकर यह तो नहीं चाहते हैं हम
पर जो हाथ बन्दूक चलाते हैं उनका तो होंसला रखो वुलन्द।
जय हिंद
-रागिनी गर्ग

Author
रागिनी गर्ग
मैं रागिनी गर्ग न कोई कवि हूँ न कोई लेखिका एक हाउस वाइफ हूँ| लिखने में मेरी रुचि है| मेरी कोई रचना किसी भी साहित्य में प्रकाशित नहीं है| फेसबुक की पोस्ट पर कमेंट करती रहती थी| लोगों को पसंद... Read more
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