कुण्डलिया · Reading time: 1 minute

सेवक और स्वामी

स्वामी हो तो राम सा, सेवक ज्यो हनुमान
रामराज साकार तब, गाए सब गुणगान
गाए सब गुणगान, धर्म को बल मिलता है
सुरभित धरती होय, कुसुम सुख का खिलता है
कह पाठक कविराय, निकलती तब ना खामी
सोच समझ सब लोग, बनाए अपना स्वामी
_____राकेश पाठक सतना म. प्र.

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