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सूर घनाक्षरी

Sharda Madra

Sharda Madra

घनाक्षरी

May 28, 2016

पत्थर पहाड़ पत्ते, तपाये तपन तपें, आग आज अजगर, सा मुख फैलाये
आदमी आकुल अब, पशु- पक्षी दुखी सब, बुझाए बुझे न बुरे, हालात बनाये
पंख पसारे पवन, और उसारे अगन, अभिमानी मेघ बन, देखो इतराये
वन विभाग है कित, चिंता से चिंतित चित,यत्न युक्ति करो कोई, आग बुझ जाये

Author
Sharda Madra
poet and story writer