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सूरज/सूर्य

-दोहा गीत

सूरज पूरब से उगा, लाया नवल प्रभात।
सभी ओर है रोशनी, खत्म हुई अब रात।

नव-कलियाँ खिलने लगीं, फूलों पर मुस्कान।
बाग-बाग में तितलियाँ, भरने लगीं उड़ान।
कलरव करते हैं विहग,मुर्गा देता बांग-
स्वागत में षटकीट दल, गाते मंगल गान।

कण कण में जीवन भरा, खुशियों की सौगात।
सूरज पूरब से उगा, लाया नवल प्रभात।

कल-कल करती है नदी, झरनों में संगीत।
हुई उषा की आगमन, बाँट रही है प्रीत।
हवा सुहानी बह रही, भरे हृदय में जोश,
खोकर हम आलस सभी,लिखें कर्म से जीत।

परेशानियाँ भूल कर, करो नई शुरुआत।
सूरज पूरब से उगा, लाया नवल प्रभात।

सुन्दर बेला प्रात की, धरती का श्रृंगार।
पहन प्रकृति मुस्का रही, नव किरणों का हार।
मन्त्र मुग्ध होता हृदय, देख प्रकृति सौन्दर्य,
सुबह हाथ टीका लिए, नजरें रही उतार।

सबके अंदर में भरे, नए-नए जज्बात।
सूरज पूरब से उगा, लाया नवल प्रभात।

सूर्य धरा की आत्मा, जीवन का आधार।
इसकी ताकत के बिना, चले नहीं संसार।
करो सूर्य की वंदना, हरे रोग संताप-
रोग निवारक देव यह ,महिमा अपरंपार

प्रकृति ऊर्जा शक्तियाँ, करे सूर्य से प्राप्त।
सूरज पूरब से उगा, लाया नवल प्रभात।
-लक्ष्मी सिंह
-नई दिल्ली

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