सूरज जब निकलता है ।।

सूरज जब निकलता है
दीपक जैसे जलता है ,
अपना प्रकाश बिखरता है
धरती को सुनहरा बनाता है ।।

खुद तप – तपकर ,
अन्धकार मिटाता है ।

अपनी रोशनी फैला कर,
पेड़ – पौधों को उभरता है ,
सूरज जब निकलता है
दीपक जैसे जलता है ।।

नदिया भी सरलता से बहती ,
सागर भी थाह लेती हैं ,
तिनका – तिनका जोड़ कर ,
चिड़िया अपना घर बनाती !!

सूरज जब निकलता है
जीवन स्वर्ण निखरता है ,
सूरज जब निकलता है
दीपक जैसे जलता है ।।

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