मुक्तक · Reading time: 1 minute

सूरज को पानी में डूबते देखा

सूरज को पानी में डूबते देखा
जलती शमां को बुझते देखा
घर टुटे तो क्या हुआ जब
आदमी को ही टुटते देखा
नूरफातिमा खातून “नूरी”

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