सूरज की किरणे

होत भोरहरिया लाली छाई,
सुबह होने की संकेत बताई l
चिड़िया चहचहाती आई,
किसानों को जगाती आई ll

सूरज की किरणे आती गई,
धीरे – धीरे मुस्कुराती गई l
चमन में प्रकाश फैलाती गई,
शबनम को पास बुलाती गई ll

फूल खिलखिलाने लगे,
सुगंध फैलाने लगे l
भंवरे गुनगुनाने लगे,
सुगंध को पानी लगे ll

नभ में बादल छाए देखें,
मौसम सुंदर सुहाने दिखें l
गुरु शिष्य को पढ़ाते दिखें,
ज्ञान की ज्योति फैलाते देखें ll

यह देख मनोहर आया,
खुशियों का बरसात लाया l
धरती का प्यास बुझाया,
खेतों में हरियाली लाया ll

कवि – जय लगन कुमार हैप्पी
बेतिया

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