कविता · Reading time: 1 minute

सूना सूना

सूना सूना

सूना वस्तिम सूना हर कोना
प्रिय तेरे बिन मेरा क्या होना

सूना प्रकोष्ठ सूना वो झूला
प्रीत की पेंगें हाय कैसे भूला

सूना उपवन सूना उर सुमन
उड़ गया अलि तोड़ के बंधन

सूना सूना जीवन चाहे हरदम
मैं तू औ’तू मैं हो अगले जनम

रेखांकन।रेखा

*वस्तिम -घर
प्रकोष्ठ -आँगन

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दिल से दिलों तक पहुँचने हेतु बाँध रही हूँ स्नेह शब्दों के सेतु। मैं एक गृहिणी हूँ जिसने पचपन साल की उम्र में कविता लिखना आरम्भ किया है।शब्दों में खोकर…
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