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सूक्ष्म कथायें : १-५

सुक्ष्म कथा -5
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चौक पर 200 भारतीय युवक युवतियों का जमावड़ा था।
नेता सरीखे कुछ युवकों ने इशारा किया। चौक नारों से गूंजने लगा।
” हमे क्या चाहिए -आज़ादी , आज़ादी “
“भारत तेरे टुकड़े हज़ार -इंशाल्लाह ,इंशाल्लाह “
13 वर्ष के भारत ने माता का आंचल खींचा ,” माँ, आज़ादी का क्या मतलब है ?”
माता के चेहरे पर वेदना और मुस्कान का मिश्रण स्पष्ट था।
” भारत बेटे। यह कठपुतलियां है। इनको मालूम नहीं कि यही ‘आज़ादी’ है। चीन जैसे देशों में ऐसा कहते या करते तो टैंकों द्वारा कुचले जाते। इनकी लाशों को अब तक चील और कौवे नोच रहे होते “
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सूक्ष्म कथा -4
हमें तो सर्वगुण संम्पन बहु ही चाहिए।
हमें भी सर्वगुण संम्पन दामाद चाहिए।
शादी की नौबत नहीं आयी।
सभी सुख में दिन बिताने लगे।
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सूक्ष्म कथा-3
एक माँ के जुड़वाँ बेटे थे।
एक बोला :- मुझको पड़ोस से भरपूर प्यार मिलता है। घरवालों से नहीं।
दूसरा बोला :- मुझको घरवालों से भरपूर प्यार मिलता है पड़ोस से नहीं।
माँ के एक वक्ष से खून निकलने लगा दुसरे से दूध।
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सूक्ष्म कथा-2
पाकिस्तानी बंकरों से भारी गोलाबारी जारी थी।
गोलियों से लहूलुहान रेंगते हुए रुद्र, रहमान, गुरमीत और थॉमस ने बंकरों पर ग्रेनेडों से हमला कर दिया था ।
बंकर ख़ामोश हो गए थे।
तिरंगे में लिपटे शहीदों की घर वापसी थी।
धर्म कोने में खड़ा अपनी हार पर मुस्कुरा रहा था।
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सूक्ष्म कथा -1
लड़के ने लड़की को गुलाब का फूल दिया।
लड़की ने मुस्कुरा कर उसे बालों में सजा लिया।
शहर में दंगा हो गया।
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सर्वाधिकार सुरक्षित /त्रिभवन कौल

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त्रिभवन कौल
त्रिभवन कौल
दिल्ली
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