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*सुहानी बसंत ऋतु आई रे*

Neeru Mohan

Neeru Mohan

कविता

April 13, 2017

*अनंत, असीम, आलौकिक आनंद लिए अनोखी छटा छाई है |
आई-रे-आई बसंती बसंत ऋतु आई है|
प्रसून देख तितली मुस्काती हँस-हँस गाती इठलाती |
पुरवा सुहानी विहग पंख डोलाई है |

*महक बिखरी है चहके पंछी कंठगान रसमय बनी है ऋतु |
भंवरे मतवाले डोले इत-उत तितली भी इतराई है |
सोलह सिंगार से सजी है क्यारी हरियाली भरमाई है |
बसंत ऋतु है रस पीने को अब भँवरों की बारी आई है |

*लगता है प्रकृति के हर चमन में फिर से चाँदी उग आई है |
अलौकिक आनंद अनोखी छटा बिखेरती झूमती गाती बसंत पंचमी आई है |

*कलियाँ हँसती-ठिठलाती, मुस्काती हँस-हँस गाती |
पुरवा सुहानी विहग पंख डोलाई है |अनिल बहे ऐसे जैसे मलय सुगंध फैलाई है|
आई रे आई अनोखी बसंती वसंत ऋतु आई है |

Author
Neeru Mohan
व्यवस्थापक- अस्तित्व जन्मतिथि- १-०८-१९७३ शिक्षा - एम ए - हिंदी एम ए - राजनीति शास्त्र बी एड - हिंदी , सामाजिक विज्ञान एम फिल - हिंदी साहित्य कार्य - शिक्षिका , लेखिका friends you can read my all poems on... Read more
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