कविता · Reading time: 1 minute

सुहाग

मेरे भारत की पावन नारी
नारियों में श्रेष्ठ कहाती है
ये अपने सुहाग की खातिर
यम से भी लड़ जाती है।

मांँ पार्वती ने सती रूप में
पति अपमान न सहन किया
सुहाग के मान के कारण
अग्नि कुंड का वरण किया
मान सुहाग का सर्वोपरि है
जीवन की बलि चढ़ाती है
ये अपने सुहाग की खातिर
यम से भी लड़ जाती है।

पतिव्रता सावित्री के जब
पति को मृत्यु ने था खींचा
तब सती ने सुहाग के संग
यमराज का किया पीछा
सत्यवान और सावित्री के
गीत हर सुहागन गाती है
ये अपने सुहाग की खातिर
यम से भी लड़ जाती है।

चित्तौड़ की सौन्दर्य सम्राज्ञी
रानी पद्मिनी थी पति प्रिया
सुहाग की पवित्रता खातिर
ही पतिव्रता ने संकल्प किया
सुहाग मर्यादा की रक्षार्थ
जीवित जौहर में समाती हैं
ये अपने सुहाग की खातिर
यमराज से भी लड़ जाती है।

पति की चिरायु की चाह में
करती करवाचौथ का व्रत
निर्जल व निराहार रहकर
सुहाग प्रेम में रहती है रत
बाद पति मुख देखने के
ही वह अन्न जल खाती है
ये अपने सुहाग की खातिर
यम से भी लड़ जाती है।

भारत की नारी के हृदय में
सुहाग का सर्वोच्च स्थान
पति प्रेम ही उसकी भक्ति
पति उसका भगवान् है।
भारत की नारी पग-पग पर
इस सत्य को दर्शाती है
ये अपने सुहाग की खातिर
यम से भी लड़ जाती है।

रंजना माथुर
अजमेर (राजस्थान )
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
©

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