.
Skip to content

गुलाबी सर्दियों की दस्तक

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

कविता

February 15, 2017

????
सुबह की धूप
आज कल अच्छी लगने लगी है।
शाम की हवाएँ
फिर से तन को सिहराने लगी हैं।

गुलाबी सर्दियाँ
फिर से दस्तक देने लगी हैं।
हरी-हरी घास पर
ओस की शफ्फाक बूँदें दिखने लगी हैं।

गुलाबों की महक
फिजाओं में घुलने लगी हैं।
सफेद नारंगी हरसिंगार
हरी-हरी घास पर बिछने लगी हैं।

खेत मे सरसों की
पीले-पीले फूल इठलाने लगी है।
धुंध की चादर ओढ
धरती आकाश गले मिलने लगी है।

भवरों और तितलियाँ
बागों में फूलों पर इतराने लगी है।
पंक्षियों की कलरव
मधुर-मधुर लगने लगी है।

नवीन रूप धरा की
श्वेत सुगंधित लगने लगी है।
मौसम के साथ
उपवन भी नव रूप धरने लगी है।
????—लक्ष्मी सिंह

Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more
Recommended Posts
गज़ल
१२२-१२२-१२२-१२ आने लगी शमा दिलजलो को जलाने लगी पतंगो को यूं आज़माने लगी गले ज़िंदगी के जरा वो लगी कज़ा मुस्कुरा साथ आने लगी मिलाकर... Read more
सुन री सखि
गीत सुन मेरी सखी रात होने लगी प्रेम की मौज होठों खिलने लगी रात सूनी इच्छा सी जताने लगी देह ज्यो सँजना मे समाने लगी... Read more
अब नफ़रत की धुंध छँटने लगी। जिन्दगी तुझमें फिर सिमटने लगी।।
अब नफ़रत की धुंध छँटने लगी। जिन्दगी तुझमें फिर सिमटने लगी।। चूड़ियों की अजीब ख्वाईश है। शाम होते ही ये खनकने लगी।। आ भी जाओ... Read more
दिल की धड़कन बढ़ने लगी/मंदीप
बातो में बात अब मिलने लगी, सासों में सांस अब गुलने लगी। जब भी लूँ हाथो में हाथ तुमारा, दिल की दड़कने बढ़ने लगी। लूँ... Read more