गुलाबी सर्दियों की दस्तक

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सुबह की धूप
आज कल अच्छी लगने लगी है।
शाम की हवाएँ
फिर से तन को सिहराने लगी हैं।

गुलाबी सर्दियाँ
फिर से दस्तक देने लगी हैं।
हरी-हरी घास पर
ओस की शफ्फाक बूँदें दिखने लगी हैं।

गुलाबों की महक
फिजाओं में घुलने लगी हैं।
सफेद नारंगी हरसिंगार
हरी-हरी घास पर बिछने लगी हैं।

खेत मे सरसों की
पीले-पीले फूल इठलाने लगी है।
धुंध की चादर ओढ
धरती आकाश गले मिलने लगी है।

भवरों और तितलियाँ
बागों में फूलों पर इतराने लगी है।
पंक्षियों की कलरव
मधुर-मधुर लगने लगी है।

नवीन रूप धरा की
श्वेत सुगंधित लगने लगी है।
मौसम के साथ
उपवन भी नव रूप धरने लगी है।
????—लक्ष्मी सिंह

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