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==सुप्रभात ==

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

मुक्तक

September 17, 2017

“जाग मुसाफिर हुआ सवेरा,
हुई भोर अब मिटा अंधेरा।
ये दुनिया एक रैन बसेरा,
क्या तेरा और क्या है मेरा।
इक दिन छोड़ देना है डेरा,
उस मालिक को भज ले मूरख,
जो सच्चा संरक्षक तेरा।”

– – रंजना माथुर दिनांक 20/06/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
©

Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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