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सुन प्रीतम की बात…संघर्ष

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कुण्डलिया

September 22, 2017

सुन प्रीतम की बात…कुंडलिया छंद
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जीवन तो संघर्ष है,हरपग में चुनौती।
एक चुनौती धकेली,अगली खडी होती।।
अगली खडी होती,सजग बने रहिए यार।
शान से रहिए तुम,करिए हँस सब स्वीकार।
सुन प्रीतम की बात,प्रेम दोस्ती बना भवन।
जिसमें खिलखिलाए,मस्ती भरा ले जीवन।
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अष्टभुजा नौ स्वरूपा,कृपा मनाधार माँ।
विघ्न हरने मंगल को,आय भक्त-द्वार माँ।।
आय भक्त-द्वार माँ,बोलिए जय माता दी।
पुष्प दीप जल चढा,मन्नते-सुख आता जी।
सुन प्रीतम की बात,माँ हरती सबके कष्ट।
शत्रु -संहारे माँ, ले शक्ति सम भुजा अष्ट।
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प्रीत सभी से कीजिए, नेकी का ये काम।
हृदय में अपनापन हो,लबों पे राम नाम।।
लबों पे राम नाम,जीवन सुधर जाएगा।
दुख छूमंतर होय,सुख दौडकर आएगा।
सुन प्रीतम की बात,गाओ सदा प्रेम गीत।
घृणा से घृणा जने,प्रीत से जने है प्रीत।
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शहद सरिस मीठे बनो,भाए हर मन बंधु।
खुशबू आनंंदित करे,बूँद-बूँद से सिंधु।।
बूँद-बूँद से सिंधु,नेक कर्म तो अमर है।
हृदय-वच सरिता ही,बहती सदैव अधर है।
सुन प्रीतम की बात,पार नहीं कीजिए हद।
विष दो विश्वास नहिं,बनोगे यार सम शहद।
…..राधेयश्याम बंगालिया प्रीतम
कृत

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