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सुन प्रीतम की बात….भाग जाएँ ग़म

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कुण्डलिया

October 22, 2017

ग़म को ठोकर लगा तू,फुटबॉल की माफ़िक।
हरपल बस मुस्क़रा तू,रे फूल की माफ़िक।।
रे फूल की माफ़िक, जीने में मज़ा आए।
खिला हुआ चेहरा,हर किसी को है भाए।
सुन प्रीतम की बात,रोकना न भैया क़दम।
जोश-होश में चलो,डरकर भाग जाएँ ग़म।
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शरीफ़ का ख़ुदा न और,पर श्रम है दृढ़ डोर।
सूरत एक दफ़ा मियाँ, सीरत असीम छोर।।
सीरत असीम छोर,गुण धारण कीजिए रे।
उच्च संस्कारों से,सबका मन लीजिए रे।
सुन प्रीतम की बात,ज़िंदगी है ये लतीफ़।
जीत आपकी होय,बने रहिएगा शरीफ़।
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फ़रेब कर खुश न होना,ये बेवकूफ़ी है।
फ़रेबी को वफ़ा नहीं,न ही मिले खुशी है।।
न ही मिले खुशी है,अभिमान तू न कीजिए।
वफ़ा हेतु वफ़ा है,दग़ा से दग़ा लीजिए।
सुन प्रीतम की बात,न करना कभी रे ऐब।
विश्वास हद में कर,कदापि न करना फ़रेब।
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तुम्हारी हँसी हसीन,कमल-सी लगती है।
घन के घूँघट से प्रिया,ज्यों बिजली चमकती है।।
ज्यों बिजली चमकती है,तम को ये मिटाती है।
बादल के हृदय में,प्यार घना जगाती है।
सुन प्रीतम की बात,बादल बरसता भारी।
बिजली से प्रेम की,घन ख़ुमारी तुम्हारी।
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भौर के सूर्य-सी प्रिया,दीद की मदहोशी।
साहिल को छू ज्यों लहर,स्पर्श की खामोशी।।
स्पर्श की खामोशी,आलिंगन मस्त तेरा।
जलेबी में जैसे, भरा हो यार रस निरा।
सुन प्रीतम की बात,दीद है प्यार का दौर।
नयन-भरे ख़्वाब रे,ज्यों मदमस्त खिली भौर।
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? राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम?
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