Dec 15, 2020 · कविता
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” सुन कोरोना ! ”

सुन कोरोना ! जब तु आया था ,
सब के मन में डर समाया था ।

ना तु अपना है ना तु पराया है ,
तु तो बस एक साया है ।
छोटी छोटी गलतियां हमारी तुने याद दिलाया है ,
दुनिया के इतिहास में सिर्फ अपना नाम दर्ज़ कराने आया है ।

आज नहींं तो कल ,
एक दिन तो तेरा नामो – निशां मिट जाएगा ।
तेरी वैक्सिंग ढूढ़ कर ,
कोई वैज्ञानिक तो अपना नाम अमर कर जाएगा ।

धन्यवाद

ज्योति
नई दिल्ली

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ज्योति
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