सुनो

सुनो, कुछ नही है तो यादो में आते क्यों हो
पल – पल ख्यालो में आकर सताते क्यों हो
न किस्मत अपनी, न जिगर तुममे इतना
फिर सपने दीद के दिल में सजाते क्यों हो !!
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@—डी. के निवातिया –@

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