.
Skip to content

सुनो

डी. के. निवातिया

डी. के. निवातिया

शेर

January 5, 2017

सुनो, कुछ नही है तो यादो में आते क्यों हो
पल – पल ख्यालो में आकर सताते क्यों हो
न किस्मत अपनी, न जिगर तुममे इतना
फिर सपने दीद के दिल में सजाते क्यों हो !!
!
!
!
@—डी. के निवातिया –@

Author
डी. के. निवातिया
नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का... Read more
Recommended Posts
आओ बैठो क्षण दो क्षण , सुनो सुनाओ पल दो पल, जीते क्यों हो रीतेपन में , रहते क्यों हो खाली मन से, कुछ मेरी... Read more
कपकपाती थरथराती ये सज़ा क्यों है?
कपकपाती थरथराती ये सज़ा क्यों है फिर भी ठंड का इतना मज़ा क्यों है? ये सिहरन, ये ठिठुरन ये गरमाई क्यों है देर से उठने... Read more
ग़ज़ल ..''ज़िंदगी तुझे गुरूर क्यों है..''
************************************ ज़िंदगी तुझे गुरूर क्यों है ये शराब सा शुरुर क्यों है पल पल टूटा बिखरा बिखरा वक़्त सितमगर मगरूर क्यों है हाँ... डरा हुआ... Read more
पागल जैसा पागल क्यों है
पागल जैसा पागल क्यों है मन इतना भी चंचल क्यों है भरा भरा है घर तो पूरा खाली माँ का आँचल क्यों है हरियाली है... Read more