सुनो...

सुनो… जब दुनियां ख़तम होने के मुहाने पे खड़ी होगी
तो याद रखना …
कोई पंछी फिर भी आसमां में बिचर रहा होगा
कोई बच्चा मां के आंचल में मचल रहा होगा
कहीं किसी खेत में कोई दाना अंकुर ले रहा होगा
कहीं किसी पहाड़ से झरना कोई फूट रहा होगा
मछली और औरत कहीं तो बच्चा जन रही होगी
अलसाई किसी फूल से भवरा रस पी रहा होगा
और, सुनो… मैं भी इश्क और इन्कलाब पे लिख रही होऊंगी
और तुम चुपके से देख रहे होगे
सुनो… सब कुछ ख़तम नहीं होता
प्यार हमेशा रोता हुआ नहीं होता…

~ सिद्धार्थ

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