सुनो रंगबाज

सुनो रंगबाज
तुम आदत से बाज नहीं आओगे
अपनी कला दिखाते रहे
कभी रंगों से
कभी रेतों पे
उस से भी मन ना भरा
तो सीख लिए
पानी में कलाबाजी करना
डूबते हुए जीवन को बचाना
कोई हाेता है क्या इतना भी
ह्रदय स्पर्शी कलाकार??
क्या मेरे प्रश्न का उत्तर दोगे??
अल्पआयु से ही करते रहे
निस्वार्थ सब की सेवा
गाँव की
समाज की
आम नागरिक की
सरकारी अधिकारी की
तरह तरह की करतब दिखाते रहे
कहो??
क्या पाया??
और क्या मिला??
तुम सादे कागजों पे
लिखते रहे
जिंदगी
सवप्न
संवेदना
अर्थ
अभीष्ट
अपने हाथों की लकीरों से
और हम नासमझ
मात्र देखा किये
फूल पत्ती
इंसानी चेहरा
नर
नारी
चिड़ियां
हम देखते रहे तुम्हारी
कलाकृतियों में बारीकियां
पर ढूढ़ ना पाये
इन चटक रंगों में
तुम्हारी उदासी को
अनुराग को
समझ ना सके
तुम्हारी आंतरिक व्यथा को
तुम भटकते रहे तीर पर
जलचर बनकर
करते रहे अप्रत्याशित
हृदय विदारक कार्य
ना मृत्यु का भय
ना जीवन का मोह
तुम अध्यवसायी होके भी
अकिंचन रहे
क्या ये तुम्हारा दोष है?
कि तुम त्याज्य हो
या फिर लाचार निष्ठुर है
यहाँ की
संस्था
समाज सेवक
अवसरवादी
उच्च अधिकारी
या खुद शासन प्रबंध
या फिर हम समाज
ये समझ ले
कि कलाकार
का अर्थ ही होता है
आत्महत्या!!!

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