सुनो अवश्य समझा पावोगे

डरा सो मरा ✍️
मृत्यु सबको आती है.
सबको पढ़ाया जाता है.
मानने को कोई तैयार नहीं.

गीता सिर्फ़ हाथ रखकर
मौके भुनाने के लिये है.

एक व्यक्ति नहीं.
विशेष व्यक्ति
एक बहुत बडे सेलेब्रिटी.
और भी बहुत कुछ.

गोदी वाले को छोड़
पेट वाले की आश
.
ज्ञान के प्रणेता महापुरुष को
???
क्या आप जान सकते हैं ??
शायद आसान है
नाम लेना गुनाह/अपमान.
.
इसीलिये सवाल नहीं उठते.
कुड़ते रहो.
भूखे हो रोना पड़ेगा.
बच्चा भी वही करता है.
समझदार के हाथ खाली है.
कौआ मस्त व्यस्त है.
हंस/विवेक/इमान दबे हुये.
खोजना कोई नहीं चाहता.
भ्रम कोई तोड़ना नहीं चाहते.
चक्रव्यूह काल्पनिक है.
खुद पकडे है.
काँव काँव बहुत अधिक है.
इसीलिये अशांत है.
मोक्ष चाहिए
मिला ही है
बस पहचान बिना.
गुमराह हैं.

वैद्य महेन्द्र सिंह हंस

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