Jul 8, 2016 · कविता
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सुनि ले अम्मा कासे बोली आपन शुद्ध बघेली !!

बहुत दिना भा खाए होइगा बहुरी लाटा तेली !
अजुअव देख कहा हम बिसरन घुघुरी गुड़ के भेली !!

बचपन के दिन कभौ ना लउटी घर अई कइके दंगा !
बहरा अउर नदी मा कूदी होई होई हम सब नंगा !!

रोज़ एकठे जघिआ फाटय छाला पड़य हथेली !
सुनि ले अम्मा कासे बोली आपन शुद्ध बघेली !

सुधि आबाथी अम्मा हमही सार बुसउला सथरी !
जाऊँ सुंदर हम ओढ़ी के सोई धोती बाली कथरी !!

साथ मा रोटी अउर कनेमन जब हाथे मा देते !
लाला हीरा मुन्ना कहिके झट से गोद मा लेते !!

बिछुड़ गए सब साथी आपन अब केके संग खेली !
सुनि ले अम्मा कासे बोली आपन शुद्ध बघेली !

जब खेली हम गोली गिट्टा लेहे डड़उका मरते !
चोट लगय जब हाथ पाव मा ज़ख्म तहिन ता भरते !!

तोता कस रोज़ बिहन्ने रटते पढ़ ले दादू भइया !
उरिन नहीं हम तोसे कबहूं सुनि ले मोरे मइया !!

देख देख जिउ कुहुक उठत है कब बनी मोर हवेली !
सुनि ले अम्मा कासे बोली आपन शुद्ध बघेली !

कहे रहन ना अम्मा तोसे तोरव एकदिन लउटीं !
हाथ के तोरे चूल्हा बरतन खोबा दूसर अउटी !!

गाड़ी घोड़ा बगली बँगला नौकर चाकर होई !
दुसरे घरके बनके बिटिया धोती ओन्ना धोई !!

हाथ पाव मा तेल लगाईं दुलहिन नई नवेली !
सुनि ले अम्मा कासे बोली आपन शुद्ध बघेली !!

मौलिक Kavi Ashish Tiwari Jugnoo
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