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सुनहरे पल

Brijpal Singh

Brijpal Singh

कविता

January 4, 2017

वो हर लम्हा
सुनहरा होता है
जो अनुरूप हमारे
साथ खड़ा होता है
न रंग, न रूप
न ही भेद कोई
समय भी कोई
ख़ास नहीं होता
कभी चाहकर
भी नहीं मिलता
कभी बिन चाहे
मिल जाता है
यद्यपि सोचें और
करें मनन तो
हर पल सुनहरा
ही होता है
मानों तो है
न मानों तो नहीं
कभी जब डूबें
हो दूर गहराई में कहीं
उस क्षीण पल में भी
खुशियाँ अपार होती है
समझ कर अगर
कर लो पार तो
और खुशियाँ हज़ार् होती हैं
पल-पल को
हर पल से जियो
जिस जहाँ हैं हम अभी
तरसते हैं कई
यहाँ तक आने को
और कई तो
पहुँचते तक नहीं
इसीलिये जियो दिल से
हर लम्हें को
शायद यहीं
सुनहरा बन जाए !!

– —————बृजपाल सिंह !

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Author
Brijpal Singh
मैं Brijpal Singh (Brij), मूलत: पौडी गढवाल उत्तराखंड से वास्ता रखता हूँ !! मैं नहीं जानता क्या कलम और क्या लेखन! अपितु लिखने का शौक है . शेर, कवितायें, व्यंग, ग़ज़ल,लेख,कहानी, एवं सामाजिक मुद्दों पर भी लिखता रहता हूँ तज़ुर्बा... Read more

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