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सुदामा/आत्म ज्ञान के पथिक, प्रेम की वसुंधरा वह

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

कुण्डलिया

March 30, 2017

(1)
प्रेमी के हित कृष्ण ने, समता रख मान|
राज्यसभा से दौड़ कर, रखा सखा का मान||
रखा सखा का मान, दे दिया आधा आसन|
अश्रुधार बौछार, भाव से देखे शासन||
कह “नायक” कविराय, ज्ञान की मग के नेमी|
गहकर चेतन-लोक, बनो जागृत सह प्रेमी||

सह=समर्थ

(2)
मामा, सद् श्री कृष्ण के, कंस, अहं की खान|
भौतिकता की बाँह फँस, प्रेमहीन विज्ञान||
प्रेम हीन विज्ञान, स्वयं क्षतिमान बने हैं|
सूखे उर की शान,द्वंद का गाँव बने हैं||
कवि “नायक” कविराय भावमय ज्ञान-सुदामा
बन, गह योग सु कृष्ण , मरेंगे मद के मामा||

योग=तप और ध्यान

(3)
वह पंडित-चित् रूप सत्, नहीं जगत्-गति-दीन|
निर्धन कहना ठीक पर , ना दरिद्र की बीन||
ना दरिद्र की बीन, मुक्त जलभरी सुराही|
शास्त्रार्थ के बाद, गर्ग ने बेटी ब्याही||
कह “नायक” कविराय, बोधमय-अति आगर कह|
आत्म -ज्ञान के पथिक, प्रेम की वसुंधरा वह||

बृजेश कुमार नायक
जागा हिंदुस्तान चाहिए एवं क्रौंच सुऋषि आलोक कृतियों के प्रणेता

पंडित=विद्वान
चित्=आत्मा
सत्=सत्ता या अस्तित्व से युक्त
आगर=दक्ष

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Author
बृजेश कुमार नायक
कोंच,जिला-जालौन (उ प्र) के बृजेश कुमार नायक साहित्य की लगभग सभी विधाओं के रचनाकार हैं |08मई 1961को ग्राम-कैथेरी(जालौन,उ प्र)में जन्में रचनाकार बृजेश कुमार नायक की दो कृतियाँ "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" प्रकाशित हो चुकी है |पूर्व राज्य... Read more
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