गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

सुख, समृद्धि का रंग बरसे अबके बार के होली में

सातो रंग इंद्र धनुष के , हो जीवन की रंगोली में।
गुझिया खाकर मुँह मीठा हो ,और मिठास हो बोली में।
सबके उर आनन्द समाए तब जाकर कुछ बात बने,
सुख, समृद्धि का रंग बरसे ,अबके बार के होली में।
अथक प्रेम हो घर परिवार में ,और सुखों का सागर हो।
हर घर में आनन्द समाए , सदा सहाय करुणाकर हो।
उन्नति और आनन्द भरा हो, हर परिवार के झोली में।
सुख, समृद्धि का रंग बरसे ,अबके बार के होली में।
हर परिवार के बूढ़े ,बच्चे ,वयस्क जन खुशहाल रहें।
धन आवक में बरकत हो ,पूरे जीवन मालामाल रहें।
दुख का साया पास न आये ,बरस बीते हँसी ठिठोली में।
सुख, समृद्धि का रंग बरसे, अबके बार के होली में।
-सिद्धार्थ पाण्डेय

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