Skip to content

सुख की पहचान

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

कविता

April 21, 2017

????
काश सुख की होती पहचान।
होता उसका भी एक दुकान।
?
खुश होता फिर हर इन्सान।
फिर ना होता कोई परेशान।
?
काश होता सुख का कोई पेड़।
तोड़ लाता लगाता उसका ढेर।
?
फिर ना कोई गम में रोता ढोता।
फिर खुशी से हर चेहरा मुस्कुराता।
?
बैठे-बैठे मैं ये सब सोच रही थी।
मन संग मन की पाती बाँच रही थी।
?
कोई तो बतला दे इसका सच।
दुख से कैसे जाये सब बच?
?
अपने अंतरमन मैं टटोल रही थी।
दिमाग की गठरी खुद खोल रही थी।
?
तभी अचानक कोई सब बोल गया।
मन की सारी उलझन खोल गया।
?
कहा कि मैं हूँ तेरे ही अंदर में।
तुम्हारे ही मन रूपी समंदर में।
?
मैं हूँ तुम्हारे हर एक अहसास में।
क्यों भटकते हो बाहर प्यास में।
?
मैं हूँ बच्चों की किलकारी में।
संतोष की हर एक प्याली में।
?
दुख के बाद सुख लगता प्यारा।
समझो तुम समय का ये इशारा।
?
इन्सान ने साधन लाख जुटाया।
पर सुख को खरीद ना पाया।
?
दुख से ही सुख की कीमत है।
सुख से दुख में रहती हिम्मत है।
?
जीवन सुख दुःख का है जोड़ा।
सबको मिलता है थोड़ा-थोड़ा।
????—लक्ष्मी सिंह ??

Share this:
Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

आज ही अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साथ ही आपकी पुस्तक ई-बुक फॉर्मेट में Amazon Kindle एवं Google Play Store पर भी उपलब्ध होगी

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

सीमित समय के लिए ब्रोंज एवं सिल्वर पब्लिशिंग प्लान्स पर 20% डिस्काउंट (यह ऑफर सिर्फ 31 जनवरी, 2018 तक)

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you