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सुंदर सलिल सुकोमल तू है,नयन नीर बहावे क्यो

कृष्णकांत गुर्जर

कृष्णकांत गुर्जर

गज़ल/गीतिका

February 5, 2017

सुंदर सलिल सुकोमल तू है,नयन नीर बहावे क्यो |
मधुर मधुर बाणी से प्यारी,हँसती और हँसाती क्यो||

बात बात का बना पथंगा,तन तन मे इठलावे क्यो|
मेरे प्राणो की प्राणप्यारी ,एेसै मुँह लटकावे क्यो||

माँ बापू ने क्या बोला है,मुझको नही वताती क्यो|
अभी निकालू घर से उनको,नयन नीर बहाबे क़्यो||

ओ मेरी राजदुलारी सुनले , हसती नही हँसाती क्यो|
खाना बनाया मेने प्यार से,खाती नही खिलाती क्यो||

रोज करू मे तेरी पूजा,ऐसे मुँह लटकावे क्यो |
सुंदर सलिल सुकोमल तू है नयन नीर बहावे क़्यो||

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Author
कृष्णकांत गुर्जर
संप्रति - शिक्षक संचालक G.v.n.school dungriya G.v.n.school Detpone मुकाम-धनोरा487661 तह़- गाडरवारा जिला-नरसिहपुर (म.प्र.) मो.7805060303

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