कविता · Reading time: 1 minute

सीसीटीवी

सीसीटीवी
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बिना आँखों के
सबकुछ देखती,
एक पल के लिये भी न
अपनी छुपी आँखों से
कुछ भी ओझल होने देती।
बड़ी शातिर है ये
इसके आगे अच्छे अच्छे सूरमाओं की
दाल तक नहीं गलती।
हर पल, हर समय,हर मौसम में
निर्बाध अपने कर्तव्य पालन में
तत्पर रहती।
मौन धारण किये चुपचाप
अपनी परिधि में एक पत्ते तक को
नजरों से न
ओझल होने देती।
मौके बेमौके अच्छे अच्छों को
ये नंगा कर
सत्य सामने रख देती।
अपराधी गुण्डे मवाली
इससे बहुत घबराते,
इससे दूर रहने के हथकंडे
सदा ही आजमाते।
सच की चोरी ये नहीं करती
गलत बयानी से सदा बचती,
आमजन मानस के बीच ये
गर्व से सीसीटीवी कहलाती।
✍सुधीर श्रीवास्तव

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संक्षिप्त परिचय ============ नाम-सुधीर कुमार श्रीवास्तव (सुधीर श्रीवास्तव) जन्मतिथि-01.07.1969 शिक्षा-स्नातक,आई.टी.आई.,पत्रकारिता प्रशिक्षण(पत्राचार) पिता -स्व.श्री ज्ञानप्रकाश श्रीवास्तव माता-स्व.विमला देवी धर्मपत्नी,-अंजू श्रीवास्तवा पुत्री-संस्कृति, गरिमा संप्रति-निजी कार्य स्थान-गोण्डा(उ.प्र.) साहित्यिक गतिविधियाँ-विभिन्न विधाओं की रचनाएं कहानियां,लघुकथाएं…
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